Chronic Disease Management: मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, गठिया और COPD जैसी पुरानी बीमारियों का प्रभावी प्रबंधन

पुरानी बीमारियाँ (Chronic Diseases) आज दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी हैं। भारत में भी लाखों लोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया, अस्थमा और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इन बीमारियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये लंबे समय तक बनी रहती हैं और निरंतर देखभाल तथा जीवनशैली में सुधार की मांग करती हैं।


सही समय पर निदान, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और व्यवस्थित उपचार के माध्यम से इन बीमारियों को नियंत्रित कर व्यक्ति एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकता है।


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डायबिटीज (मधुमेह): कारण, लक्षण, जांच, उपचार और संपूर्ण देखभाल

डायबिटीज यानी मधुमेह आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है। आधुनिक जीवनशैली, असंतुलित आहार, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसकी प्रमुख वजह हैं। समय पर पहचान और सही उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।


Mahatma Gandhi Institute of Medical Sciences, Hisar में हम डायबिटीज के मरीजों को सम्पूर्ण चिकित्सा, जागरूकता और Lifestyle Management प्रदान करते हैं।


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रात में बार-बार पेशाब? समय रहते करें प्रोस्टेट जांच

🩺 प्रोस्टेट क्या है?

प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है जो पुरुष प्रजनन तंत्र का हिस्सा है। यह मूत्राशय (bladder) के नीचे और मूत्रमार्ग (urethra) के चारों ओर स्थित होती है। इसका मुख्य कार्य वीर्य (semen) के एक हिस्से का निर्माण करना है, जो शुक्राणुओं को पोषण देता है।


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किडनी की सुरक्षा, स्वस्थ जीवन की गारंटी : MGIMS, Hisar

किडनी हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं, जो खून को फिल्टर करके अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं। जब किडनी सही से काम नहीं करतीं, तो इसे किडनी की खराबी या गुर्दा रोग कहते हैं। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए, किडनी की खराबी के लक्षणों को जानना और सही इलाज करना बहुत महत्वपूर्ण है।

किडनी के खराब होने के लक्षण


थकान और कमजोरी : किडनी के खराब होने का सबसे सामान्य लक्षण है अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस करना। इसका कारण किडनी द्वारा शरीर में टॉक्सिन्स को सही तरीके से बाहर न निकाल पाना है, जिससे शरीर में विषैले पदार्थ जमा हो जाते हैं और ऊर्जा स्तर गिर जाता है।

मूत्र में बदलाव : किडनी की समस्या होने पर मूत्र में बदलाव देखने को मिलता है, जैसे कि मूत्र की मात्रा में कमी या बढ़ोतरी, रंग में परिवर्तन, झागदार मूत्र, या बार-बार पेशाब लगना।

सूजन (एडिमा) : किडनी के खराब होने पर शरीर में सोडियम और पानी जमा होने लगता है, जिससे पैरों, टखनों, चेहरे और हाथों में सूजन आ जाती है।

त्वचा पर खुजली और ड्राईनेस : किडनी सही से काम नहीं कर पाती तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे त्वचा पर खुजली और ड्राईनेस हो सकती है।

भूख न लगना और उल्टी : किडनी की खराबी के कारण भूख न लगना, जी मिचलाना और उल्टी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

सांस फूलना : शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने के कारण फेफड़ों में सूजन आ सकती है, जिससे सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

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