थायरॉयड सर्जरी: कब ज़रूरी होती है, लक्षण, कारण, उपचार और रिकवरी की पूरी जानकारी

थायरॉयड की समस्या को न करें नज़रअंदाज़


थायरॉयड हमारे शरीर की एक छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो गर्दन के सामने स्थित होती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, हार्मोन संतुलन, वजन, हृदय गति और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


कई बार थायरॉयड की समस्या केवल दवाइयों से नियंत्रित हो जाती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सर्जरी ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प होती है। यदि समय रहते सही जांच और उपचार न कराया जाए, तो समस्या गंभीर रूप ले सकती है।


इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि थायरॉयड सर्जरी कब आवश्यक होती है, इसके लक्षण क्या हैं, ऑपरेशन कैसे किया जाता है, रिकवरी में कितना समय लगता है और किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।


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न्यूरोसर्जरी क्या है? कब पड़ती है ब्रेन और स्पाइन सर्जरी की आवश्यकता? जानिए लक्षण, कारण और उपचार

क्या आपको लगातार सिरदर्द, गर्दन में दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी, कमर दर्द या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस होता है?
अक्सर लोग इन समस्याओं को सामान्य थकान, उम्र या गलत जीवनशैली का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही लक्षण मस्तिष्क (Brain), रीढ़ की हड्डी (Spine) या नसों (Nerves) से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।


ऐसी स्थितियों में सही समय पर न्यूरोसर्जन (Neurosurgeon) से सलाह लेना बेहद जरूरी होता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की मदद से आज कई जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सफल उपचार संभव है, जिससे मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।


इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि न्यूरोसर्जरी क्या होती है, किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, कौन-कौन सी बीमारियों का इलाज न्यूरोसर्जरी द्वारा किया जाता है और समय पर उपचार क्यों आवश्यक है।







न्यूरोसर्जरी क्या है?


न्यूरोसर्जरी चिकित्सा विज्ञान की वह विशेष शाखा है जिसमें मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, स्पाइनल कॉर्ड, नसों और उनसे जुड़ी बीमारियों का ऑपरेशन एवं अन्य आधुनिक तकनीकों द्वारा उपचार किया जाता है।


यह केवल ब्रेन सर्जरी तक सीमित नहीं है। आज न्यूरोसर्जरी में अनेक प्रकार की समस्याओं का इलाज किया जाता है, जिनमें स्पाइन डिस्क, नस दबना, ब्रेन ट्यूमर, सिर की गंभीर चोट और कई अन्य जटिल रोग शामिल हैं।







किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?


यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण लगातार दिखाई दें तो विशेषज्ञ से जांच कराना उचित रहता है।



1. लगातार सिरदर्द


बार-बार होने वाला सिरदर्द हमेशा माइग्रेन नहीं होता। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, दवा से आराम न मिल रहा हो या उल्टी, चक्कर, धुंधला दिखाई देना जैसी समस्या भी साथ हो तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।







2. ब्रेन ट्यूमर के संकेत


ब्रेन ट्यूमर हर व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण दिखा सकता है।


संभावित लक्षण:




  • लगातार सिरदर्द

  • उल्टी

  • दौरे पड़ना

  • याददाश्त कमजोर होना

  • बोलने में कठिनाई

  • शरीर के किसी भाग में कमजोरी

  • संतुलन बिगड़ना


हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता, लेकिन समय पर जांच बेहद आवश्यक है।







3. स्लिप डिस्क और कमर दर्द


आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों में स्लिप डिस्क की समस्या तेजी से बढ़ रही है।


इसके प्रमुख लक्षण हैं—




  • कमर में तेज दर्द

  • पैरों में दर्द फैलना

  • चलने में परेशानी

  • झुकने पर दर्द बढ़ना

  • पैरों में झनझनाहट


हर मरीज को ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में सर्जरी सबसे प्रभावी विकल्प बन जाती है।







4. गर्दन का दर्द


यदि गर्दन का दर्द लगातार बना रहे और उसके साथ हाथों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो तो यह सर्वाइकल स्पाइन की समस्या हो सकती है।


समय रहते उपचार कराने से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।







5. हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन


यदि शरीर के किसी हिस्से में बार-बार सुन्नपन महसूस हो, चीजें पकड़ने में कठिनाई हो या चलने में असंतुलन महसूस हो तो यह नसों या स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है।







6. रीढ़ की हड्डी की चोट


सड़क दुर्घटना, ऊंचाई से गिरना या खेल के दौरान लगी चोट के कारण स्पाइन को गंभीर नुकसान हो सकता है।


यदि चोट के बाद—




  • चलना बंद हो जाए

  • हाथ-पैर काम न करें

  • पेशाब या मल नियंत्रित न हो


तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।







7. नस दबने की समस्या (Nerve Compression)


जब किसी नस पर दबाव पड़ता है तो मरीज को दर्द, जलन, झनझनाहट या कमजोरी महसूस होती है।


यह समस्या गर्दन, कमर, कंधे या हाथ-पैर किसी भी हिस्से में हो सकती है।







8. ब्रेन हेमरेज


ब्रेन हेमरेज एक मेडिकल इमरजेंसी है।


इसके सामान्य लक्षण हैं—




  • अचानक तेज सिरदर्द

  • बोलने में परेशानी

  • शरीर का एक हिस्सा काम न करना

  • बेहोशी

  • चेहरे का टेढ़ा होना


ऐसी स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।







न्यूरोसर्जरी किन बीमारियों में की जाती है?


आधुनिक न्यूरोसर्जरी के माध्यम से अनेक जटिल रोगों का इलाज किया जाता है।


इनमें प्रमुख हैं—




  • ब्रेन ट्यूमर

  • स्लिप डिस्क

  • स्पाइनल ट्यूमर

  • ब्रेन हेमरेज

  • सिर की गंभीर चोट

  • स्पाइन फ्रैक्चर

  • नस दबना

  • हाइड्रोसिफेलस

  • जन्मजात मस्तिष्क संबंधी विकार

  • ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया

  • स्पाइनल स्टेनोसिस






क्या हर मरीज को ऑपरेशन की जरूरत होती है?


नहीं।


यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि न्यूरोसर्जरी विभाग में जाने वाले हर मरीज का ऑपरेशन किया जाता है।


वास्तव में कई मरीजों का इलाज निम्न तरीकों से सफलतापूर्वक किया जाता है—




  • दवाइयों द्वारा

  • फिजियोथेरेपी

  • जीवनशैली में बदलाव

  • इंजेक्शन आधारित उपचार

  • नियमित निगरानी


सर्जरी तभी की जाती है जब अन्य उपचार पर्याप्त न हों या मरीज की स्थिति गंभीर हो।







आधुनिक न्यूरोसर्जरी के फायदे


वर्तमान समय में न्यूरोसर्जरी पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित हो चुकी है।


इसके कुछ प्रमुख लाभ हैं—




  • अधिक सटीक ऑपरेशन

  • कम रक्तस्राव

  • कम दर्द

  • जल्दी रिकवरी

  • संक्रमण का कम खतरा

  • बेहतर परिणाम

  • मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है






किन लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए?


निम्न लोगों को समय-समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए—




  • लगातार सिरदर्द वाले व्यक्ति

  • बार-बार चक्कर आने वाले लोग

  • गर्दन और कमर दर्द से परेशान मरीज

  • मधुमेह के कारण नसों की समस्या वाले मरीज

  • सड़क दुर्घटना के बाद चोट वाले मरीज

  • बुजुर्ग जिनमें चलने में कठिनाई हो

  • हाथ-पैरों में लगातार सुन्नपन रहने वाले लोग






समय पर उपचार क्यों जरूरी है?


मस्तिष्क और रीढ़ की बीमारियों में देरी कई बार स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है।


यदि बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ ली जाए तो—




  • इलाज आसान होता है।

  • खर्च कम हो सकता है।

  • रिकवरी तेज होती है।

  • ऑपरेशन की आवश्यकता भी कई मामलों में टाली जा सकती है।

  • मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।






स्वस्थ मस्तिष्क और रीढ़ के लिए जरूरी सावधानियां


अपने ब्रेन और स्पाइन को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाएं—




  • नियमित व्यायाम करें।

  • सही मुद्रा (Posture) में बैठें।

  • लंबे समय तक लगातार न बैठें।

  • संतुलित आहार लें।

  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।

  • रक्तचाप और मधुमेह नियंत्रित रखें।

  • हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करें।

  • पर्याप्त नींद लें।

  • मानसिक तनाव कम करें।

  • किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।






निष्कर्ष


न्यूरोसर्जरी केवल ऑपरेशन का नाम नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के समग्र उपचार की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा शाखा है। लगातार सिरदर्द, ब्रेन ट्यूमर के संकेत, स्लिप डिस्क, नस दबना, गर्दन या कमर दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर अनदेखा करना भविष्य में गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।


यदि आपको या आपके किसी परिजन को ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञ से परामर्श लें। समय पर जांच और सही उपचार से जटिल समस्याओं का सफल प्रबंधन संभव है और मरीज बेहतर, सुरक्षित तथा सक्रिय जीवन जी सकता है।







Frequently Asked Questions (FAQs)


1. न्यूरोसर्जरी क्या होती है?


यह मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, स्पाइनल कॉर्ड और नसों से संबंधित रोगों के उपचार की चिकित्सा शाखा है।



2. क्या हर स्लिप डिस्क में ऑपरेशन जरूरी होता है?


नहीं। अधिकांश मरीज दवाइयों, फिजियोथेरेपी और अन्य उपचारों से ठीक हो जाते हैं। केवल चुनिंदा मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है।



3. ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?


लगातार सिरदर्द, उल्टी, दौरे, धुंधला दिखाई देना, कमजोरी और संतुलन बिगड़ना इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं।



4. हाथ-पैरों में सुन्नपन किस बीमारी का संकेत हो सकता है?


यह नस दबने, स्पाइनल समस्या, मधुमेह या अन्य न्यूरोलॉजिकल कारणों से हो सकता है। सही जांच आवश्यक है।



5. ब्रेन हेमरेज के लक्षण दिखने पर क्या करना चाहिए?


यह एक आपातकालीन स्थिति है। तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें और विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लें।



6. क्या न्यूरोसर्जरी सुरक्षित है?


आधुनिक तकनीकों और अनुभवी विशेषज्ञों की सहायता से आज न्यूरोसर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है।



7. कब न्यूरोसर्जन से मिलना चाहिए?


यदि सिरदर्द लगातार बना रहे, कमर या गर्दन का दर्द बढ़ता जाए, शरीर में कमजोरी, सुन्नपन, संतुलन बिगड़ना या किसी गंभीर सिर/रीढ़ की चोट हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

ENT विशेषज्ञ हिसार: कान, नाक और गले की समस्याओं को न करें नज़रअंदाज़

महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (MGIMS), हिसार में आधुनिक एवं विशेषज्ञ ENT उपचार


कान, नाक और गला (ENT) हमारे शरीर के ऐसे महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनका सीधा संबंध हमारी सुनने, बोलने, सांस लेने और भोजन निगलने की क्षमता से होता है। इन अंगों में होने वाली छोटी-सी परेशानी भी दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। कई लोग कान में दर्द, बार-बार जुकाम, नाक बंद रहना, गले में खराश या आवाज बैठने जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर लंबे समय तक अनदेखा कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।


यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को कान, नाक या गले से जुड़ी कोई भी समस्या बार-बार हो रही है, तो समय रहते ENT विशेषज्ञ से जांच करवाना बेहद जरूरी है। महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (MGIMS), हिसार में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक सुविधाओं के साथ ENT रोगों का समुचित उपचार उपलब्ध है।







ENT रोग क्या होते हैं?


ENT का अर्थ है Ear (कान), Nose (नाक) और Throat (गला)। इन तीनों अंगों से संबंधित सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज ENT विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। चूंकि ये अंग आपस में जुड़े होते हैं, इसलिए किसी एक अंग की समस्या दूसरे अंग को भी प्रभावित कर सकती है।


उदाहरण के लिए, नाक की एलर्जी या साइनस की समस्या लंबे समय तक रहने पर गले में संक्रमण या कान में दबाव महसूस हो सकता है।







किन लक्षणों को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए?


1. कान में दर्द, खुजली या पानी आना


यदि आपके कान में लगातार दर्द रहता है, खुजली होती है या कान से पानी अथवा मवाद निकलता है, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।







2. सुनाई कम देना या कान में आवाज़ आना


यदि आपको लोगों की बात ठीक से सुनाई नहीं देती, टीवी की आवाज़ बार-बार बढ़ानी पड़ती है या कान में सीटी जैसी आवाज़ आती है, तो यह सुनने की समस्या का संकेत हो सकता है।


इसके संभावित कारण हो सकते हैं—




  • कान में मैल जमा होना

  • संक्रमण

  • उम्र बढ़ना

  • तेज़ आवाज़ का प्रभाव

  • नसों से संबंधित समस्या






3. बार-बार नाक बंद रहना


यदि लंबे समय तक नाक बंद रहती है, सांस लेने में कठिनाई होती है या एलर्जी की समस्या बनी रहती है, तो ENT विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है।


नाक बंद रहने के कारण—




  • एलर्जी

  • साइनस

  • नाक की हड्डी टेढ़ी होना

  • नाक में पॉलिप






4. साइनस की समस्या


साइनस होने पर व्यक्ति को निम्न समस्याएं हो सकती हैं—




  • सिर दर्द

  • चेहरे में भारीपन

  • नाक बंद रहना

  • गाढ़ा बलगम

  • सूंघने की क्षमता कम होना


यदि यह समस्या बार-बार हो रही है तो इसे हल्के में न लें।







5. गले में दर्द या निगलने में परेशानी


गले में लगातार दर्द, खाना निगलने में कठिनाई या बार-बार संक्रमण होना कई बीमारियों का संकेत हो सकता है।


इनमें शामिल हैं—




  • टॉन्सिल

  • गले का संक्रमण

  • एलर्जी

  • एसिड रिफ्लक्स






6. आवाज़ में बदलाव या खराश


यदि आपकी आवाज़ दो सप्ताह से अधिक समय तक भारी रहती है या लगातार खराश बनी रहती है, तो यह वोकल कॉर्ड या अन्य गले की समस्या हो सकती है।







7. बार-बार टॉन्सिल की समस्या


बार-बार टॉन्सिल होने पर—




  • बुखार

  • गले में तेज दर्द

  • खाना निगलने में कठिनाई

  • मुंह से दुर्गंध


जैसी समस्याएं हो सकती हैं।







8. खर्राटे या सांस लेने में परेशानी


तेज़ खर्राटे, नींद के दौरान सांस रुकना या सांस लेने में कठिनाई भी ENT विशेषज्ञ द्वारा जांच की जाने वाली समस्याएं हैं।







कब तुरंत ENT विशेषज्ञ से मिलना चाहिए?


यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें—




  • कान से पानी या खून आना

  • अचानक सुनाई कम देना

  • लगातार कान दर्द

  • बार-बार साइनस होना

  • नाक से लगातार खून आना

  • दो सप्ताह से अधिक समय तक आवाज़ बैठना

  • निगलने में परेशानी

  • बार-बार टॉन्सिल होना

  • लंबे समय तक नाक बंद रहना






समय पर इलाज क्यों जरूरी है?


ENT रोगों का शुरुआती अवस्था में उपचार कराने से—




  • बीमारी जल्दी नियंत्रित होती है।

  • गंभीर जटिलताओं से बचाव होता है।

  • सुनने की क्षमता सुरक्षित रहती है।

  • सांस लेने में आसानी होती है।

  • संक्रमण फैलने की संभावना कम होती है।

  • इलाज की अवधि कम हो सकती है।






MGIMS, हिसार में उपलब्ध ENT सेवाएं


महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (MGIMS), हिसार में कान, नाक एवं गले से संबंधित अनेक रोगों की जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है।


यहां निम्न समस्याओं का उपचार किया जाता है—




  • कान का संक्रमण

  • सुनने की समस्या

  • साइनस

  • नाक की एलर्जी

  • नाक बंद रहना

  • टॉन्सिल

  • गले का संक्रमण

  • आवाज़ से संबंधित समस्याएं

  • निगलने में कठिनाई


विशेषज्ञ डॉक्टर आधुनिक जांच के बाद रोग के अनुसार उचित उपचार की सलाह देते हैं।







कैशलेस उपचार की सुविधा


MGIMS, हिसार में मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सरकारी एवं बीमा योजनाओं के अंतर्गत कैशलेस उपचार उपलब्ध है।



उपलब्ध सुविधाएं


आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार


ESI (Secondary Care) सुविधा


ECHS सुविधा


सभी प्रमुख TPA एवं हेल्थ इंश्योरेंस के माध्यम से कैशलेस उपचार


इन सुविधाओं के माध्यम से पात्र मरीज गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।







MGIMS, हिसार क्यों चुनें?



  • अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर

  • आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं

  • सटीक जांच एवं उपचार

  • मरीज केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं

  • कैशलेस उपचार की सुविधा

  • स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण

  • सभी आयु वर्ग के मरीजों के लिए बेहतर देखभाल






ENT रोगों से बचाव के आसान उपाय



  • कान में कोई नुकीली वस्तु न डालें।

  • अत्यधिक शोर से कानों की सुरक्षा करें।

  • धूम्रपान एवं तंबाकू से बचें।

  • पर्याप्त पानी पिएं।

  • एलर्जी का समय पर उपचार कराएं।

  • बार-बार संक्रमण होने पर स्वयं दवा न लें।

  • संतुलित भोजन करें।

  • व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें।






निष्कर्ष


कान, नाक और गले की समस्याओं को सामान्य समझकर अनदेखा करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि आपको बार-बार कान में दर्द, सुनने में कमी, साइनस, नाक बंद रहना, गले में दर्द, आवाज़ में बदलाव या टॉन्सिल जैसी समस्या हो रही है, तो समय रहते विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे उचित कदम है।


महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (MGIMS), हिसार में आधुनिक सुविधाओं, अनुभवी विशेषज्ञों और कैशलेस उपचार योजनाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण ENT सेवाएं उपलब्ध हैं।







अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


1. ENT विशेषज्ञ किस प्रकार की बीमारियों का इलाज करते हैं?


ENT विशेषज्ञ कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों जैसे कान दर्द, सुनाई कम देना, साइनस, टॉन्सिल, गले का संक्रमण और नाक की समस्याओं का उपचार करते हैं।



2. कान से पानी आने पर क्या करना चाहिए?


यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। बिना देरी किए ENT विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।



3. साइनस की समस्या के सामान्य लक्षण क्या हैं?


नाक बंद रहना, सिर दर्द, चेहरे में भारीपन, गाढ़ा बलगम और सूंघने की क्षमता कम होना इसके सामान्य लक्षण हैं।



4. आवाज़ लंबे समय तक बैठी रहे तो क्या करें?


यदि आवाज़ दो सप्ताह से अधिक समय तक सामान्य न हो, तो ENT विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।



5. क्या MGIMS, हिसार में आयुष्मान भारत योजना की सुविधा उपलब्ध है?


हाँ, पात्र मरीजों के लिए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार उपलब्ध है।



6. क्या ESI और ECHS की सुविधा भी उपलब्ध है?


हाँ, अस्पताल में ESI (Secondary Care), ECHS तथा TPA के माध्यम से भी कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध है।



7. अस्पताल कहाँ स्थित है?


पता: ITI Chowk, Behind Hari Palace, Tosham Road, Hisar.



8. अपॉइंटमेंट कैसे बुक करें?


बुक अपॉइंटमेंट: 99902-64611, 99924-87111

शरीर और त्वचा की गांठ (Soft Tissue & Skin Lump) को न करें इग्नोर: जानें कारण, लक्षण और इलाज

अक्सर शरीर के किसी हिस्से पर अचानक कोई गांठ (Lump) महसूस होने पर हम घबरा जाते हैं। कई लोग डर के कारण या इसे सामान्य समझकर महीनों तक डॉक्टर के पास नहीं जाते। यह सच है कि त्वचा के नीचे पनपने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना भविष्य में किसी बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।


समय रहते सही निदान और आधुनिक सर्जरी से इन गांठों (Soft Tissue & Skin Lumps) से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MGIMS), हिसार में अनुभवी सर्जनों की टीम इन समस्याओं का सटीक और सुरक्षित इलाज कर रही है।


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